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:: वीर
हरियाणे के
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पहाड़ कै नकेल घाल दैं, वीर हरियाणे के
शेर जैसी दहाड़ मारैं, रणवीर हरियाणे के
दुश्मन का ढेर कर दैं, वीर हरियाणे के
मॉटी के म्हाँ खेल कै, मॉटी पै ज़ॉन लुटावैं सैं
आँधी हो, तूफान हो; बिल्कुल ना घबरावैं सैं
मौत का सेहरा सिर पै रोज़, दिन-रात बँधावै सैं
हिमालय-से पहाड़ उनकी, हिम्मत पै शरमावैं सैं
जब आगै कदम बढ़ावैं, तो आगै बढ़ते जावैं सैं
ऑपै लिखैं देश की तकदीर वीर हरियाणे के
देश की ख़ातर जीया करैं, देस की ख़ातर मरणा सै
सुख की सेज़ छोड़ कै, उनै कष्टाँ का घूँट भरणा सै
फूलाँ का बिस्तर त्याग कै, पत्थराँ पै शीश धरणा सै
हरियाण वो सिंहा में बस काम या है करणा सै
दुश्मन की छाती पै पैर उनै, जाकै धरना सै
कर दें गॉत उनका चीर-चीर, वीर हरियाणे के
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धरा
के वे लोग, जब खुशी तैं खेलैं होली सैं
फौलादी म्हारे वीर सरहदां पै झेलैं गोली सैं
लाल-लाल खून तैं, वे वीर खेलैं होली सैं
आपणी दूल्हण मान कै, वे मौत नै भर लैं कोली सैं
एक पल भी ना सोचैं, खतरा तैं भर लैं झोली सै
ऐसे सैं महान शूरवीर हरियाणे के
हरियाणा के वीरां ने, देश का ऊँचा भाल करया
गर्व तैं फूली भारतमाता, बेटाँ नै निहाल करया
जब भी किसी मुसीबत नै, लक्ष्य कोय विशाल धरया
टूट पड़े भूखे शेर से, दुश्मन को बेहॉल करया
आपणी जाण लुटा कै हरियाणे का मिसाल करया
राव तुलाराम जैसे थे अहीर हरियाणे के |
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