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कवितायें

 
 

देस जांदा परदेस जाईये

ज़मींदारां के बालक

पौ की एक जिड़ाई रात

कोर्ट में कुत्ता

रामलील्ला

पुलिसिया रोहतास

बीरेन्द्र अर बीड़

सींग अर पूंझड़

बिदाई का गीत

माटी का चूल्हा

तांगे ऑला बूढ़

रंग-बिरंगी होली आई

चुपचाप चिड़ी का बाप

कढ़ लिया, तू पढ़ लिय

बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैग

जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

सुणिये मेरी माँ

न्यारे-न्यारे स्वाद जगत मैं

बाज़ार मैं घर खटाया ना करत

बख़त तैं आइये

सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै

म्हारे हरियाणा की सै बात निरॉली

वीर हरियाणे के

तीजाँ का त्यौहार आय

चन्नी चॉला खोटा होग्य

राबड़ी भी न्यूँ बोल

सवारी-ए-सवारी

तू आदमी बणता-बणता रहग्या

गेहूँ की बॉल

सॉच का बीज़ बोऊँगा

असली हीरो

आपणी बहाण प्यारी सै

बड़ रै बड़, तेरी पाणी मैं जड़

जीणा ? किते किसा, किते किसा

रावण  | दूस्सर

 
         
 

:: जय-जय हिन्द के वीर ज़वान ::


जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

तेरी शूरमा सूरत पै जाऊँ कुर्बान

 

सुथरा तगड़ा छैल-छबीला

कर्द मुच्छैल रौब-रोबीला

सिंह जैसे तेरे नैन चमकीले

फड़-फड़-फड़कैं बाजू जोशीले

खूब-गज़ब की सै तेरी शॉन

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

 

बहाणां का भाई, तू माँ का प्यारा

बूढ़े बाप की आख्यां का तारा

जिस गैल ब्याहया, वा सूरत प्यारी

गज बण गोरी केसर क्यारी ==>

 

==>  जन-जन का तू सै भगवान

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

 

हाथ बन्दूक, जाणो राखै खिलौणा

गोली-बारूदां का बिछा बिछौणा

कट-कट बाजैं बूट तेरे कॉले

चमकैं सैं फीत, पॉटैं सैं चाले

लोह की टोपी पहरै बलवान

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

 

आया जब दुश्मन भक्षक बण कै

सरहदां पै अड्या तू रक्षक बण कै

वतन पै बख्त बुरा जब आया

हामनै आगै खड्या तू पाया

बैरी का ना छोडै निशान

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

 
       
 
         

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