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:: तीजाँ
का त्यौहार आया
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तीजाँ का त्यौहार आया, ठण्डी-सी फूहार लाया
छम-छम पाणी बरसै हरियाणै मैं
हरे खेत, हरे बाग चौगरदे नै आज दीखैं
हरे रंग तै भरया, हर घर से हरियाणे मैं
कोथली संधारे चाल्ये, चौगरदे नै मौज़ छाई
शकरपारे, घेवर, आया; साथ मैं सुहॉली आई
लाम्बी-लाम्बी पींग देखो डाल्याँ पै लहराई
डरैं कोन्या बहू-छोरी, सासू का नाक तोड़ लाई
जुग-जुग जीओ मेरी सासड़ मेरी मायां जैसी
मन तैं ईसा आदर बरसै हरियाणे मैं
छम-छम पाणी बरसै हरियाणै मैं
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छोटे-छोटे
बालक चाल्ये, कट्ठे हो कै टोलियाँ मैं
भाजे जावैं, खांदे जावैं गुल-गुल से झोलियाँ मैं
कड़ का सार घाम फट ज्या, जब खूद लागै ठण्डी ठार
मॉटी के मँह खेल कै, शेर गाबरू होये ये त्यार
ठाड्डा जब गात होग्या जा सीमा पै तैनात होया
घराँ सजनी का मन तरसै सै हरियाणे मैं
छम-छम पाणी बरसै हरियाणै मैं
ईसा तोड़ का मींह बरसै, भरे-भरे चॉलैं खॉल
किसान देख कै राजी हो ज्याँ, खेत इब होवैंगे खुशहाल
कोय भाज कै नै हल्दी ल्याया, जिसकै लिकड़या कीड़ी नाल
टप-टप टपका लाग्या, नीचै ल्या कै धरया थॉल
हरा-हरा न्यार होया, डांगराँ का उद्धार होया
दूध-घी की बणी मौज़ घर-घर सै हरियाणे मैं
छम-छम पाणी बरसै हरियाणै मैं |
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