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सवारी-ए-सवारी
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ठुकम-ठुक धकम-धक, टम्पू हो चाहे लारी,
सवारी ए सवारी, सवारी ए सवारी
सूरज लिकड़ै जग जगण लगै
दुनियां सड़कां पै बगण लगै
न्यारे-न्यारे साधन अड्डयां पै
सवारियां नै चुगण लगै
कोय जावै तहसीलां मैं, कोय निभावे रिश्तेदारी
ठुकम ठुक धकम-धम, सवारी-ए-सवारी
चीनी, साबुन, कुर्ते, पात्तण,
ले कै चला कोय झोले मैं,
बांध खिंडके पंचायती चॉले
ब्याह और ज़मीन के रोले मैं
सिंगर-टिंगर कोय सजनी चॉली, गेल्यां पेटी ठॉरी
ठुकम ठुक धकम-धम, सवारी-ए-सवारी
किसै का खून पी रहया कर्जा
किसै ने सतावैं किल्ले नहरी
कोय बीमारी के चक्कर मैं
कोय जावै सै कोर्ट-कचहरी
खुशी-खुशी कोय चढ़या रेल मैं, किसे नै चिन्ता ख़ॉरी
ठुकम ठुक धकम-धम, सवारी-ए-सवारी
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भीड़ कती भी कम होवै ना
चाहे जेठ का हो महीना
ठठ रूपज्या पौ के पॉले मैं
चोटी मैं आवै पसीना
चाहे सामण की झड़ी हो या भादुवे की दुफ्फारी,
ठुकम ठुक धकम-धम, सवारी-ए-सवारी
सुबह-शाम देखो लोगां का,
लॉगा रह सै आणा-जाणा
एक मरग्या दो निपजैं सैं,
पहर मनुष-देह का बाणा
जी ना करै, पर जाणा पड़ै, कैसी या लाचारी
कोय आया, अर कोय गया, याहे दुनियादारी
ठुकम-ठुक धकम-धक, टम्पू हो चाहे लारी,
ठुकम ठुक धकम-धम, सवारी-ए-सवारी |
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