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:: सिर
मैं धूम्मां-सा रहै सै
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चक-चक हो सै
झक-झक हो सै
बेरा ना के कहै सै
सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै
बीमार नै दवाई ना, आपस मैं रसाई ना
सावित्री-सी नारी ना, लछमण जैसा भाई ना
पूरा ना गरीब का ख़र्चा हो
झूठ्याँ चोरां की-ए चर्चा हो
ईमानदारी खोगर मैं रहै सै
बेरा ना के कहै सै
सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै
यारी क्यूँ धन-दौलत की, मेरे मित्तर बेईमान क्यूँ
राज चलै सै शैतानी का, झूठ इतणी महान क्यूँ
मन होग्या सबका चोर क्यूँ
जलती तपती भोर क्यूँ
जूल्म की लू बहै सै
बेरा ना के कहै सै
सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै
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ब्याहली का लत्ता जलता क्यूँ, जोबन गिरता-पड़ता चलता क्यूँ ?
अन्नदाता के करम मैं अन्न नहीं, ओले-सा ओ पिघलता क्यूँ ?
अमावस की रात काली नै
ज़मींदार का दिवाली नै
दीवा बिना जलया रहै सै
बेरा ना के कहै सै
सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै
काया भूलसी ख़ाक मेरी, तन की नस-नस आग मेरी
पाप घणा अर ज़हर सै थोड़ा, रूह एक बेबस नाग मेरी
कान सैं दो, अर शोर घणे
शाह एक, और चोर घणे
मेरे गुण का महल ढहवै सै
बेरा ना के कहै सै
सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै |
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