| |
::
रामलील्ला
::
गाम के बाहर एक ऊँचा-सा टील्ला
उसपै होया करै आये साल रामलील्ला
पर इबके साल चॉला पाटग्या
राम बण मैं जाण तैं नाटग्या
न्यू बोल्या, मैं इबकै कोन्यां जां
खामखां बण मैं धक्के कोन्या खां
बाबू, तनै वचन भरे थे, तू-ए निभा
मनै तो घरांये पड़या रहण दे, मत सता
दशरथ बोल्या, रै चल्या जा, ना बिध्न करै
राम नैं तो रामायण मैं, बण मैं जायें सरै
नहीं तो क्यूकर बणैगी रामलील्ला
लोग के कहवैंगे यो ठाड्डा भरया टील्ला
राम बोल्या, बाबू तेरी कोन्या मानूं बात
मौसी नै समझा दे, ना चढ़ावै म्हारी श्यात
तन्नै आपणी बहू मनाणी सै, क्यूकरै-ए मना
चाहे नया सूट सिमवा, चाहे उसकी टूम घड़ा
पर मैं तो तेरी बातां मैं ना आऊँ
इबकै बण मैं बाबू कोन्या जाऊँ
दशरथ बोल्या, चल्या ज्या बेटा
राम बोल्या, मेरे क्यूं करै सै टोटा
मैं जब बण में चालूँगा
अपणी कॉख़ मैं तीर-कमाण घालूँगा
सीता भॉजी आवैगी उभाणे पाँयां
कहवैगी कित जाग्या मेरी नणद के भाई
अपणी जान नै फंद मैं ना घालूँगी
सुणले उरान, मैं भी गैल्यां चालूँगी
इब बता बाबू, मैं एकला, गैल्या सुन्दर नारी
तेरे घर की इज़्ज़त, किस-किस की नजरां चढ़ैगी
इब पहल्यां जिसे लोग नहीं,
जिनकी आँख शर्म तैं झुकैगी
बूढ़ा हो चाहे जवान इसनै,
बुरी नजर तकैगी
कित टोहवैंगे पंचवटी,
लोगों ने बण काट लिए सारे
कित खावैंगे वे फल मीठे,
धूम्मै नै चाट लिए सारे
चलो एक मिनट खातर मान भी लेऊँ
अर बण मैं जाण की ठाण भी लेऊँ
गैल्या फेर यू लछमण भी सींगटी ठावैगा
कौण पाथैगा टीकड़े इसके, किततैं रोटी खावैगा
अर कितै जाकै हामनै घाल भी ली झोंपड़ी
अर किसै सूर्पणखां की देख घूमगी खोपड़ी
पर इबकै तो तेरे गाबरूआं की तृष्णा जागै-ए-जागै
अर तेरे सूर्यवंशी खानदान कै बट्टा लागै-ए-लागै
कित रहे सैं वे लछमण जीसे भाई, कित रहरे जती
दूसरे की बीर नै ना तकैं, कड़ै सैं इसे धर्मवान पति
फैशन टी वी तैं मन होग्या चंचल और सुभा भुरभुरा
कुछ भी पल्लै ना रहैगा सब किमै डूब्बैगा करया धरया
==> |
|
==>
रोला
जागै-ए-जागै
लॉठा बाजै-ए-बाजै
पर इबकै मैं स्वर्ण-मृग के पाछै ना जाऊँ
खामखां की भाग-दौड़ मैं, गोड्डे ना तुड़ाऊँ
तू के जाणे सै लछमण न्यू-ए-रहगा खड़या
कॉल ऐ अखबार मैं पढ़ी थी,
एक देवर भाभी नै ले उड़या
चलो और सारी बात न्यूं की न्यूं रही,
तेरी रामायण ज्यूं की त्यूं रही
फेर पंचवटी मैं रावण आवैगा,
बणकै बाबा मेरी सीता नै ठावैगा
ना तो पहलड़े धर्म रहे, ना रहे वे रावण
बख्श देगा सीता नै, ना दिखदा कोय कारण
कित सैं वे पहलड़े माणस, कित सैं वे दीन-ईमान
जो टोह लावैं फ्री-फण्ड मैं सीता नै,
ना रहे वे बावले हनुमान
इब तो हर कोय माणस नै,
मतलब की ताखड़ी मैं तोलै सै
पराये की तो बात के,
आपणा भी मतलब सर बोलै सै
अर फेर रोला-रॉला करकै,
सीता उल्टी आ भी गई
अग्नि-परीक्षा करण की घड़ी,
मेरे सिर पै छा भी गई
पर मुसीबत मेरे सिर तैं कोन्या टॅलै,
चाहे शर्त ला ले, सीता जलै-ए-जलै
मान ज्या बाबू, तू गुड़ारत करवावै गा
बहु जलाण की धारा लगवा कै,
मुकदमे मैं फँसवावै गा
क्यूँ कटवावै सै कोर्टा के चक्कर
वकील मारैंगे दस साल तक टक्कर
तूं न्यू कर बाबू, केकैयी मौसी नै समझा दे
ना मानै-समझै तो, उन्नै ठाडूँ धमका दे
मैं तेरी काली गऊ, मन्नै तो रहण दे
भरत नै बला ले, उस नै जाण दे
दशरथ बोल्या, भरत क्यू कर जावैगा
वो तो बण मैं तैं तेरी खड़ाऊँ लावैगा
राम बोल्या,
बाबू तू तो बोअलॉ सै
आड़ै ए तो रोअलॉ सै
चौदह साल के बाद, के उल्टी दे देगा वो मेरी अमानत?
के मन्नै राज उल्टा दुआअण दी, तू दे देगा जमानत?
चौदह साल की तो बात ए के, चौदह दिन मैं छक्के छूट ज्याँ सैं
एक दिन मुख्यमन्त्री बाहर चलाज्या, पाछै तै सरकार टूट ज्या सैं
इब तो आगै ए आगै, भरत ए बणवास काटैगा
राम तो आये साल बाबू, बण में जाण तैं नाटैगा
राम तो आये साल बाबू, बण में जाण तैं नाटैगा |
|