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कवितायें

 
 

देस जांदा परदेस जाईये

ज़मींदारां के बालक

पौ की एक जिड़ाई रात

कोर्ट में कुत्ता

रामलील्ला

पुलिसिया रोहतास

बीरेन्द्र अर बीड़

सींग अर पूंझड़

बिदाई का गीत

माटी का चूल्हा

तांगे ऑला बूढ़

रंग-बिरंगी होली आई

चुपचाप चिड़ी का बाप

कढ़ लिया, तू पढ़ लिय

बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैग

जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

सुणिये मेरी माँ

न्यारे-न्यारे स्वाद जगत मैं

बाज़ार मैं घर खटाया ना करत

बख़त तैं आइये

सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै

म्हारे हरियाणा की सै बात निरॉली

वीर हरियाणे के

तीजाँ का त्यौहार आय

चन्नी चॉला खोटा होग्य

राबड़ी भी न्यूँ बोल

सवारी-ए-सवारी

तू आदमी बणता-बणता रहग्या

गेहूँ की बॉल

सॉच का बीज़ बोऊँगा

असली हीरो

आपणी बहाण प्यारी सै

बड़ रै बड़, तेरी पाणी मैं जड़

जीणा ? किते किसा, किते किसा

रावण  | दूस्सर

 
         
 

:: राबड़ी भी न्यूँ बोली ::


क्यूकर जीवां इस दुनिया में, कोन्या जिया जा

राबड़ी भी न्यूँ बोली, मन्नै दान्दाँ गेल्या खा

 

याराँ की हामनै यारी देखी, नौकरी सरकारी देखी

अफसर हो या बाबू, सबनै लागै रिश्वत प्यारी देखी

घर के काम्माँ मैं तेल फूंकती, बड़े सॉब की लारी देखी

हाँ जी करकै करूँ नौकरी, मेरी कोन्या पार बसा

राबड़ी भी न्यूँ बोली, मन्नै दान्दाँ गेल्या खा

 

याराँ की हामनै यारी देखी, यो इश्क बुरी बीमारी देखी

एक छोरे के प्यार मैं मरती, काच्ची कली कुँवारी देखी

माँ-बाप अर छोड़ कुटुम्ब नै, घर तैं भाज्जण की तैयारी देखी

सोनै बरगी इज़्जत का पल मैं पीतल हो ज्या

राबड़ी भी न्यूँ बोली, मन्नै दान्दाँ गेल्या खा

 

याराँ की हामनै यारी देखी, याराँ की सरदारी देखी

मुँह पै करते राम-राम, बगल मैं कटारी देखी

लगते ही पटका खावै, इसी मीठी चोट करारी देखी

ना लॉगै प्यारी या झूठी यारी, इसतैं होज्या बेपरवाह

राबड़ी भी न्यूँ बोली, मन्नै दान्दाँ गेल्या खा  ==>

 

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याराँ की हामनै यारी देखी, रेल की सवारी देखी

बीड़ी का धुम्मां, ताशां का रोला, हुकम की बेगां प्यारी देखी

कितै बैठे मलंग सुल्फा पीवैं, कितै मूँगफली करारी देखी

सांझ तड़के की भाज-दौड़ में तन का झोड़ा होज्या

राबड़ी भी न्यूँ बोली, मन्नै दान्दाँ गेल्या खा

 

याराँ की हामनै यारी देखी, मतलब की दुनिया सारी देखी

 सच्ची प्रीत इस जगत् मैं, फिरती मारी-मारी देखी

 सच्चे ईश्वर की प्रीत बिना, तड़पती रूह बिचारी देखी

 दूसरे का जो थाम करो तो, होज्या थारा भी भला

 राबड़ी भी न्यूँ बोली, मन्नै दान्दाँ गेल्या खा

 
         
       
 
         

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