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कवितायें

 
 

देस जांदा परदेस जाईये

ज़मींदारां के बालक

पौ की एक जिड़ाई रात

कोर्ट में कुत्ता

रामलील्ला

पुलिसिया रोहतास

बीरेन्द्र अर बीड़

सींग अर पूंझड़

बिदाई का गीत

माटी का चूल्हा

तांगे ऑला बूढ़

रंग-बिरंगी होली आई

चुपचाप चिड़ी का बाप

कढ़ लिया, तू पढ़ लिय

बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैग

जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

सुणिये मेरी माँ

न्यारे-न्यारे स्वाद जगत मैं

बाज़ार मैं घर खटाया ना करत

बख़त तैं आइये

सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै

म्हारे हरियाणा की सै बात निरॉली

वीर हरियाणे के

तीजाँ का त्यौहार आय

चन्नी चॉला खोटा होग्य

राबड़ी भी न्यूँ बोल

सवारी-ए-सवारी

तू आदमी बणता-बणता रहग्या

गेहूँ की बॉल

सॉच का बीज़ बोऊँगा

असली हीरो

आपणी बहाण प्यारी सै

बड़ रै बड़, तेरी पाणी मैं जड़

जीणा ? किते किसा, किते किसा

रावण  | दूस्सर

 
         
 

:: पुलिसिया रोहतास ::


आपणा सै वो ढ़ब्बी ख़ास

सारै कहैं उसने पुलिसिया रोहतास

 

ड्यूटी का कतई ख़रा सै माणस

न्यू समझो कैप्टन कुक का आटा सै, कतई ना छाणस

 

शहर मैं रोज़ गश्त लगावै सै

कई ढाल की ड्यूटी निभावै सै

 

एक दिन उसनै कानून अपनै ढंग तैं मोड़ दिया

हाथ मैं आया-ऊया एक जेबकतरा छोड़ दिया

 

मैं भी धोरै खड़ा था, मैं बोल्या, क्यूँ रै

छोड़ दिया तन्नै यू दुष्ट न्यू रै

 

वो बोल्या, रै इसकी तो सारी माफ़ सै

रै बावली बूच; समझा कर, स्टाफ सै

 

मै बोल्या, भाई इस लिखा-पढ़ी तैं मेरा पांडा छुड़ाइयो

इबकै जेबकतराँ की पोस्ट लिकड़ै तै, मन्नै भी बताइयो

 

उसकी इस हरकत पै एस पी सॉब छो मैं आये

तुरन्त उसको ट्रैफिक ड्यूटी के ऑडर भिजवाये

 

चौराहे पै बहोत कसूता घाम था

तलै सड़क अर ऊपर राम था

 

सड़क पै एक बुढ़िया भाज़ी आवै थी

मोटर-गाड़ियाँ न देख, वा बांगी-बांगी जावै थी

 

रोहतास नै सोच्या, बुढ़िया मरैगीं, बुढ़ै बारै, किसने सिर करैगी

उसनै अपनी ड्यूटी निभाई, बड़े ज़ोर तैं सीटी बजाई

 

पर बुढ़िया के तो समझ ना आवै

सुणे एक ना, चाली जावै

 

सैड़ दे ती बुढ़िया के धोरै जाकै

बुढ़िया नै बोल्या वो धमका कै

 

न्यू बोल्या के करी थी ती बॉवली ताई

एक सुणी ना, मन्नै इतणी सीटी बजाई

 

बुढ़िया पहल्यां तो थोड़ी-सी खांसी

अर फेर बड़ी जोर सै हांसी

 

न्यू बोल्यी, इब के कसर रह री सै

मेरी के सीटी सुणन की उमर रह री सै ==>

 

==>  एक दिन की और बात सुणाऊँ

गजब कर दिया, यार आगै के बताऊँ

 

वो खड़ा चौराहे पै, आ गी एक छोरी

सुथरी शान की अर रंग की गौरी

 

आ कै बोल्यी, मेरी हैल्प कराओ

कुछ गुण्डे मेरे पीछे पड़े सै, पाण्डा छुटवाओ

 

रोहतास बोल्या, दिल खोल्या

 

बड़ी मुश्किल में हूँ वरना ना यू दिल को भींचे होता

शुक्र सै डयूटी पै हूँ ना तो मैं भी तेरे पीछे होता

 

मैं बोल्या, तू के कहै सै

पुलिस आला हो के भावना मैं बवै सै

रोहतास बोल्या सिरीयस हो कै

देख मेरी जगहाँ खड़या हो कै

 

रै के होग्या, जै हाम लॉ एण्ड ऑर्डर के आँख-कान साँ

रै हाम भी तो धरती पै आये, हाम भी तो इंसान साँ

 

पर तू सोच, नहर मैं सड़ती लाश नै हामैं तो खींच के ल्यावँ साँ

पौ की अंधेरी रात मैं जाग कै, थामनै हामैं तो सुवावँ साँ

 

भाई, मेरै पाप कोन्या लागै

अर धर्म मेरे तैं कोन्या भाज़ै

 

लावारिस मुरदयां नै पुराणे टायरां तैं, मैं-ए जाकै जलाया करूँ

आपणा तो योए तीर्थ सै, न्यू-ए धर्म कमाया करूँ

 

तूं तो न्यूं-ए बेकार में रयाड़ जगावै सै

तू ए बता, पुलिस आलयां नै, कोए ब्याह-शादियाँ मैं बुलावै सै

 

मैं बोल्या, ठीक सै भाई, इबके तेरा बर्थ-डे मनाऊँगा

अर गिफ्ट मैं तेरे खातर सतपुत्तर ल्याऊँगा

 

न्यू बोल्या, ले आइये पर थाणे मैं ना पाइये

जै आग्या थाणै मैं, जी नै हो ज्यागा झांगल

 

उन्नै सतपुत्तरां तै तेरा पाछा पीटांगे

सारे बिछा के कांबल

 

ले आइये गैल्या, थोड़ी हल्दी अर घी

जब पिटण लागे तो जोर तै गाइये

हैप्पी बर्थ-डे टू मी, हैप्पी बर्थ-डे टू मी,

 
       
 
         

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