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:: सुणिये
मेरी माँ
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हे माँ, खतरा तो बहोत सै, पर तू घबराइये मत ना
अर जै ना भी आ पाऊँ तो नीर बहाइये मत ना
तेरी कोमल गोदी-से लागैं, नुकीले शिखर पहाड़ाँ के
तेरी ममता से फूल बणै सैं, लाम्बे काण्डे बाड़ाँ के
मेरी सोच मैं भाई नै, सरहद काहनी भजाइये मत ना
हे माँ, खतरा तो बहोत सै, पर तू घबराइये मत ना
एक-एक दुश्मन की दुश्मन हो री सै माँ म्हारी गोली
पीठ दीखा कै भाजती देखी हामनैं दुश्मनां की टोली
जिस ढाल वे कायर भॉज़े, राम किसे नै भजाइये मत ना
हे माँ, खतरा तो बहोत सै, पर तू घबराइये मत ना
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भूख
लागै सै जब मेरी माँ, कढ़ोणी का दूध याद आवै सै
वो टिण्डी घी याद आवै सै, वा लास्सी याद आवै सै
थोड़ा-सा घी बचा कै राखिये, सारा का सारा खाइये मत ना
हे माँ, खतरा तो बहोत सै, पर तू घबराइये मत ना
जो पाठ तन्नै पढ़ाया था, वो पूरा कर रहया लाल तेरा
गोली लाग कै उल्टी मुड़या, इसा लोह का पूत विशाल तेरा
अगले जन्म मैं फेर मन्नै जणिये, मेरे तैं मोह तुड़ाइये मत ना
हे माँ, खतरा तो बहोत सै, पर तू घबराइये मत ना |
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