मित्र को बतायें | सूची में जोड़ें | प्रैस | आडियो-वीडियो | सम्पर्क

   

कवितायें

 
 

देस जांदा परदेस जाईये

ज़मींदारां के बालक

पौ की एक जिड़ाई रात

कोर्ट में कुत्ता

रामलील्ला

पुलिसिया रोहतास

बीरेन्द्र अर बीड़

सींग अर पूंझड़

बिदाई का गीत

माटी का चूल्हा

तांगे ऑला बूढ़

रंग-बिरंगी होली आई

चुपचाप चिड़ी का बाप

कढ़ लिया, तू पढ़ लिय

बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैग

जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

सुणिये मेरी माँ

न्यारे-न्यारे स्वाद जगत मैं

बाज़ार मैं घर खटाया ना करत

बख़त तैं आइये

सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै

म्हारे हरियाणा की सै बात निरॉली

वीर हरियाणे के

तीजाँ का त्यौहार आय

चन्नी चॉला खोटा होग्य

राबड़ी भी न्यूँ बोल

सवारी-ए-सवारी

तू आदमी बणता-बणता रहग्या

गेहूँ की बॉल

सॉच का बीज़ बोऊँगा

असली हीरो

आपणी बहाण प्यारी सै

बड़ रै बड़, तेरी पाणी मैं जड़

जीणा ? किते किसा, किते किसा

रावण  | दूस्सर

 
         
 

:: कढ़ लिया, तू पढ़ लिया ::


कढ़ लिया, तू पढ़ लिया

सबकै हत्थै चढ़ लिया

फेर भी क्यू मिटे जा सै,

मन-ए मन क्यूँ घुटे जा सै

 

तन पै तेरे कमीज़ नहीं,

बोवण नै असली बीज़ नहीं

बाबै का-सा डेरा लागै,

घर मैं तेरे कोय चीज़ नहीं

 

तन भीज्या पसीने तैं तेरा,

खेत मैं टैम-सर पाणी नहीं

बरसां तैं तू लूटता आया,

जड़ बिघन की जाणी नहीं

सर्दी गर्मी सामण भादुआ,

सुबह-शाम तेरै साथ नहीं

फुटकर में तेरी मेहनत का,

सही दाम तेरे हाथ नहीं

 

जो तेरा इतिहास बता दे,

ऐसी कोय किताब नहीं

इकाणवें बाणवैं त्रिणावैं चुराणवैं

इनका तन्नै हिसाब नहीं

 

देही का खून चूस बगाया,

ब्याज घणा अर मूल सै थोड़ा

देस की ताकत बसै किसान मैं,

उस के होरया गात का झोड़ा

 

कित की मरोड रहै खिंडकै मैं,

रंगारी चास देण तै नाटैगा

बिना पीसां कै तेरे छोरे की डाकटर,

लास देण तै नाटैगा ==>

 

==>  खूब कमा अर ब्याज चढ़ा,

औरां नै छिका, खूद ना खा

 

आज तेरे साके बेसुरे अर,

आल्हा तेरा उदास सै

सांग पाट रहया आज तेरा,

ना कोय तख्त कै पास सै

 

दूर खेतां मैं बैठ कोय सूल्फी,

रागनी ज़हरी गावै सै

विष पीग्या, पर बणया ना शंकर, तेरी

कोण बमलहरी गावै सै

 

गूगा-नोमी बिन ढोल अर तासयां की,

दीवाली तेरी बिन खील पतासयां की

होली गॉल कै चौड़े मैं रलगी,

तीज भी बैरण खली टलगी

 

इब भी संभल ज्या, मेरी मान ज्या,

खोल आँख, भले-बुरे नै जाण ज्या

 

कोय भी तेरी कॉनी ना,

तेरे तैं किमे छानी ना

 

बेबसी की आग मैं और पकै ना,

इब किसे का सहारा तकै ना

 

तेरा सब तैं साढ़ा सढ़ लिया,

कढ़ लिया, तू पढ़ लिया

सबकै हत्थै चढ़ लिया

 
       
 
         

परिचय | कवितायें | चित्र दीर्घा | कृतियां  |  मित्र को बतायें | अपने विचार लिखें | अपनों की नज़र में

सूची में जोड़ें | प्रैस | आडियो-वीडियो | सम्पर्क

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | इ-मेल: mail@jagbirrathee.com