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:: कढ़
लिया, तू पढ़ लिया
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कढ़ लिया, तू पढ़ लिया
सबकै हत्थै चढ़ लिया
फेर भी क्यू मिटे जा सै,
मन-ए मन क्यूँ घुटे जा सै
तन पै तेरे कमीज़ नहीं,
बोवण नै असली बीज़ नहीं
बाबै का-सा डेरा लागै,
घर मैं तेरे कोय चीज़ नहीं
तन भीज्या पसीने तैं तेरा,
खेत मैं टैम-सर पाणी नहीं
बरसां तैं तू लूटता आया,
जड़ बिघन की जाणी नहीं
सर्दी गर्मी सामण भादुआ,
सुबह-शाम तेरै साथ नहीं
फुटकर में तेरी मेहनत का,
सही दाम तेरे हाथ नहीं
जो तेरा इतिहास बता दे,
ऐसी कोय किताब नहीं
इकाणवें बाणवैं त्रिणावैं चुराणवैं
इनका तन्नै हिसाब नहीं
देही का खून चूस बगाया,
ब्याज घणा अर मूल सै थोड़ा
देस की ताकत बसै किसान मैं,
उस के होरया गात का झोड़ा
कित की मरोड रहै खिंडकै मैं,
रंगारी चास देण तै नाटैगा
बिना पीसां कै तेरे छोरे की डाकटर,
लास देण तै नाटैगा ==> |
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खूब
कमा अर ब्याज चढ़ा,
औरां नै छिका, खूद ना खा
आज तेरे साके बेसुरे अर,
आल्हा तेरा उदास सै
सांग पाट रहया आज तेरा,
ना कोय तख्त कै पास सै
दूर खेतां मैं बैठ कोय सूल्फी,
रागनी ज़हरी गावै सै
विष पीग्या, पर बणया ना शंकर, तेरी
कोण बमलहरी गावै सै
गूगा-नोमी बिन ढोल अर तासयां की,
दीवाली तेरी बिन खील पतासयां की
होली गॉल कै चौड़े मैं रलगी,
तीज भी बैरण खली टलगी
इब भी संभल ज्या, मेरी मान ज्या,
खोल आँख, भले-बुरे नै जाण ज्या
कोय भी तेरी कॉनी ना,
तेरे तैं किमे छानी ना
बेबसी की आग मैं और पकै ना,
इब किसे का सहारा तकै ना
तेरा सब तैं साढ़ा सढ़ लिया,
कढ़ लिया, तू पढ़ लिया
सबकै हत्थै चढ़ लिया |
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