मित्र को बतायें | सूची में जोड़ें | प्रैस | आडियो-वीडियो | सम्पर्क

   

कवितायें

 
 

देस जांदा परदेस जाईये

ज़मींदारां के बालक

पौ की एक जिड़ाई रात

कोर्ट में कुत्ता

रामलील्ला

पुलिसिया रोहतास

बीरेन्द्र अर बीड़

सींग अर पूंझड़

बिदाई का गीत

माटी का चूल्हा

तांगे ऑला बूढ़

रंग-बिरंगी होली आई

चुपचाप चिड़ी का बाप

कढ़ लिया, तू पढ़ लिय

बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैग

जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

सुणिये मेरी माँ

न्यारे-न्यारे स्वाद जगत मैं

बाज़ार मैं घर खटाया ना करत

बख़त तैं आइये

सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै

म्हारे हरियाणा की सै बात निरॉली

वीर हरियाणे के

तीजाँ का त्यौहार आय

चन्नी चॉला खोटा होग्य

राबड़ी भी न्यूँ बोल

सवारी-ए-सवारी

तू आदमी बणता-बणता रहग्या

गेहूँ की बॉल

सॉच का बीज़ बोऊँगा

असली हीरो

आपणी बहाण प्यारी सै

बड़ रै बड़, तेरी पाणी मैं जड़

जीणा ? किते किसा, किते किसा

रावण  | दूस्सर

 
         
 

:: चन्नी चॉला खोटा होग्या ::


तूं फूलाँ की ढॉल महका करती

मैं भँवरा-सा चहका करता

दोनुआँ की ज़ॉन नै चॉला ख़ोटा होग्या

चन्नी तू भी मोटी होगी अर मैं भी मोटा होग्या

 

सिंगर डोर कै हिरनी बन कै, तू कॉलेज मैं आया करती

जुल्फां के तू झटके मारै, छौराँ नै भरमाया करती

काचे कुर्ते गाड़ कै नै, मैं भी सब पै छाया करता

तेरी नई साईकल की टोकरी मै, लूक के फूल सजाया करता

ना इब तूं रही सुराही जैसी, मैं भी फूट्या लोटा होग्या

चन्नी तू भी मोटी होगी अर मैं भी मोटा होग्या

 

राताँ नै जाग-जाग सपने दैखदा, लैला-मजनूं के भेष के

मेरी किताब सारी रही सिसकती, मैं गाणे सुणूँ मुकेश के

तेरा साथ करण की ख़ातर दो बार मैं होया फेल

और के गेल्याँ ब्याह करवागी, मेरा उल्टा पड़ग्या खेल

तूँ किसै के बागां की बणी मोरनी, मैं पंचायती झोटा होग्या

चन्नी तू भी मोटी होगी अर मैं भी मोटा होग्या ==>

 

==>  कदे-कदे तू मिले मार्किट में, दिल में होवै हंगामा जी

तेरे गेल्याँ बालक, मन्नै डर लागै, कदे न्यू ना कहदे मामा जी

तू भी चॉली जब आवै दूर तैं, जाणूँ हाथी का बच्चा-सा

आज मैं भी होग्या मोटा तोंदूँ, देख कै जी होवै कच्चा-सा

टॉट लागगी चमकण चांद-सी, बॉलां का टोटा होग्या

चन्नी तू भी मोटी होगी अर मैं भी मोटा होग्या

 

समय बीत ग्या चॉला कर दिया, म्हारी किस्मत बैहड़ी नै

दिल भर आवै सै जब देखूँ, उस गोलगप्पाँ की रेहड़ी नै

बड़े-बड़याँ की कमर तोड़ दै या बख़्त की लॉठी रै

गये दिनाँ नै याद करैं वो राताँ नै रोवै राठी रै

गई जवानी ना लौट कै आवै

चन्नी तू भी मोटी होगी अर मैं भी मोटा होग्या

 
         
       
 
         

परिचय | कवितायें | चित्र दीर्घा | कृतियां  |  मित्र को बतायें | अपने विचार लिखें | अपनों की नज़र में

सूची में जोड़ें | प्रैस | आडियो-वीडियो | सम्पर्क

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | इ-मेल: mail@jagbirrathee.com