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:: जय-जय
हिन्द के वीर सिपाही
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आपणा बोलता नचीत करगे,
लोग बेरा ना क्यूकर-क्यूकर मरगे
कोय मरग्या रेल मैं,
कोय मरया जेल मैं
कोय मरया बिन आई,
कोय मरया खेल-खेल मैं
कोय मरया हारी-बीमारी मैं,
कोय मरया झूठी यारी मैं
इश्क का किसे कै नाग लड़या,
कोय मरया खाट मैं पड़या-पड़या
किसे नै मारग्या गली का गुण्डा,
ले बैठ्या किते रैली का झण्डा
किसे नै ले बैठ्या भारी करज़,
किसे नै मारगी घणे की गरज़
किसे नै मारग्या दिल का रोग,
रेल तलै कटगे कितणे लोग
कोय पूरे करग्या सौ-के-सौ,
किसे की बख्त तैं बुझगी लौ
लोग आवैं सैं अर जावैं सैं,
बस न्यूँ-ए मर जावैं सैं
पर कुछ जवानी इसी मरै सैं,
सबके दिल पै घा करै सैं
मैं तो कहूँ इसा काम करियो,
मरणा हो तो उनकी ढाल मरियो
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जित
तड़-तड़ तड़-तड़ गोली चालैं,
गोले-बारूदाँ तैं पहाड़ भी हालैं
पर वीर जवान तो चाल्या जा सै,
इसा घर भी कितै घाल्या जा सै
भाई-बहाण माँ अर बाप सै देश,
मौत सै ब्याहली, उसका दूल्हे-सा भेष
रोकै ना मन्नै, जाण दे भाई,
आज हिमालय पै बणैगी सगाई
अर के होग्या, जै मौत भी आई,
पाछै बैठया मेरा माँ-जाया भाई
ले तिरंगा चढ्या शिखर पै,
गोली बरसै चाहे सिर पै
मौत भी एक बै तो घबराई,
जब रणबाँकुरे नै आवाज़ लगाई
आज देख या हिम्मत कर दी,
गोली छाती के मैं ठण्डी कर दी
इब घरां जाऊँगा बड़ी शॉन तैं,
जान लुटा कै हिन्द की ऑन पै
मौत तो बस इसी-ए होवै,
जब मरण पै कोय आँख ना रोवै
कायरां का के जिक्र आवैं अर जावैं सैं,
क्यूँ धरती पै आ कै बिरथा भीड़ बढावैं सैं
इसी शहादत बता किसनै पाई,
जय-जय हिन्द के वीर सिपाही
जय-जय हिन्द के वीर सिपाही |
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