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:: म्हारे
हरियाणा की सै बात निरॉली
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म्हारे प्रदेश हरियाणा की सै बात निरॉली
म्हारी धरती या पावन सै किसाना ऑली
ताकतवर सै जनशक्ति, पर फेर भी सादी-भोली
गीता-ज्ञान मिला इस धरती पै, पड़ी हरि की छोली
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-इसाई, आड़ै रहते भर-भर कोली
सामण के म्हां तीज मनावैं, फागन मैं खेलैं होली
कुरुक्षेत्र का नहाण भर दे पुण्य की पूरी थाली
म्हारी धरती या पावन सै किसाना ऑली
मर्द सुरमाँ हरियाणै के, जिनकी शेराँ जैसी चॉल सै
युद्धवीर सै हरियाणे के, बामै फोलादी ढाल सै
दुश्मन थर-थर काँपैं जिनतैं, ऐसे वीर विशाल सैं
घर-गामां मै चर्चे जिनके, कुरबानी की मिसाल सैं
हर रोड़ पै मूर्ति शहिदाँ की लागी छतरी ऑली
म्हारी धरती या पावन सै किसाना ऑली
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सुथरी शान-शक्ल की गोरी, हरियाणे की नारी सै
हिम्मत और मेहनत में, मर्दां तैं भी बाज़ी मारी सै
ममता, खरब और गीतिका जाखड़ खेलां की राजकुमारी सै
कल्पना चावला शान हरियाणे की जिनै जाणें दुनिया सारी सै
चाँद-सितारा मैं जामै बसगी वा हिम्मत आली नारी सै
म्हारी धरती या पावन सै किसाना ऑली
भारत-देश की शान हरियाणा, नये शिखर पै जा रहया सै
सारी दुनिया देखण नै आवै, ऐसा नाम कमा रहया सै
हरियाणे के विकास का रूक्का, विदेशां तक भी जा रहया सै
सच कहूँ सूँ, सूं राम की, सबनै जी-सा आ रहया सै
हर दिन दशहरा, म्हारी रात दीवाली सै
म्हारी धरती या पावन सै किसाना ऑली |
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