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बीरेन्द्र अर बीड़ी
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रै ओ बीरेन्द्र, क्यूँ पॉकै सै धरमेन्दर
हर दम बीड़ी खींचे जा सै
ज़हर तैं तन नैं सींचे जा सै
घड़ी-घड़ी मैं तूँ खांसण लाग जा सै
कुछ कहैवें सैं तन्नै, तो हांसण लाग जा सै
दस जगहाँ तैं फूक लिया कुरता, इसमैं तैं राख झड़े जा सै
धोरै कोय बैठ ना सकदा, बांस तैं कुत्ता-सा सड़े जा सै
कितना साफ दिल का तू माणस, बीड़ियाँ नै कॉला कर दिया
तन्नै आपणै शरीर की गेल्यां, यू कूणसां चॉला कर दिया
किसा छैल था तूँ, इन बिड़ियाँ नै खा लिया
इब तो इसा लागै सै, अक तरा ओड़ आ लिया
मत पीवै रै तूं मर ज्यागा
बेरा ना किस-किस नैं बिरान कर ज्यागा
जै यू-ए हॉल रहया तो, तू खटेबा करवावैगा
दीख लिया ढंग, तू बारणै आगै दरी बिछवावैगा
तू छोड़ दे बीड़ी, ये सिर नै चकरावैं सैं
कैंसर कर दैं, टीबी कर दैं; फेफडाँ ने कमजोर बणावै सैं
बोल्या, बात तेरी ठीक सै, पर मैं कुणसा अकड़ रहया सूँ
सारै कहँ सैं छोड़ दे, बता मैं के बिजली का तार पकड़ रहया सूँ
मैं बोल्या, या सारी दुनिया तन्नै ठीक समझावै सै
यू बीड़ी का ज़हरी धूम्मा, सहज-सहज मौत की तरफ ले जावै सै
हांस कै बोल्या, बात तेरी सोलह आने, ना इसमै कोय रोल सै
सहज-सहज-ए ठीक सै, हामनै के मरण की तौल सै
मैं बोल्या, तू मर के देख ले, किसे का कुछ ना जाता
यारे-प्यारे, रिश्तेदार सबका सै ऊत खाता
किसनै फुरसत सै अक सोचै, तू यू के करग्या
बस एक बै कहैंगे
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आच्छा होया, मरग्या
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एक
कहैगा, क्यूकर जाऊँ मेरी तो आज गेहूँ लिकड़णी सै
दूसरा कहेगा, बार होगी मन्नै तो रेल पकड़णी सै
कोय कहैगी, एकली क्यूकर जाऊँ मैं औरत की जात
राठी कहैगा, कोन्या जाऊँ क्यूं ना मानी मेरी बात
बस अपणी-अपणी डपली, अर आपणे-आपणे राग
किसकै फरक पड़ै सै, चाहे कितै लागी री हो आग
पर चाहे कोय टल ज्याओ पर वो क्यूकर टलैगी
कुछ ज़िन्दगी तो जरूर सै, जो इस आग मैं जलैगी
जिसनै मोड़ बांध के ल्याया था, वा-ए तेरी ब्याही
कुछ दिन तो टोहैवैगी कित गया, मेरी ननद का भाई
फेर माथे की सूनी माँग-सी, इसनै रॉही पा ज्यागी
घर-बाहर की तकरार सुण कै, वा पत्थर-सी हो ज्यागी
पौ की रात-सी लाम्बी ज़िन्दगी, उसकी क्यूकर कट ज्यागी
कोय भी ताना दे सके सै, कि निराभाग ख़सम नै खाग्यी
बस सुण कै नै वा आपणे गोड्या मै सिर दे लेगी
इन दुष्ट बीडियां की करतूत आपणे सिर पै ले लेगी
तेरा छोरा बुझैगा दादा तैं, मेरा बाबू कोड बै आवैगा?
बुढ़े बाप की खांसी मैं, वो भोला रल जावैगा
उठो-संभलो, भाइयो ! अपणी ज़िन्दगी नैं न्यू टॉलो ना
हरियाणा के छैल शरीराँ नैं, इस धुम्मे मैं गॉलो ना
रै के चॉला होगा, सारी जनता बिड़ियाँ पै जीण लागगी
इब तो न्यू सूणा सै, अक बुआ भी बीड़ी पीण लागगी
खत्म करो इस धूम्मे नैं, सुथरी ताज़ी हवा चलाओ
22, 27, पहलवान अर डमरू सारयां नै तोड़ बगाओ
फेर देखो, म्हारा हरियाणा एक नये शिखर पै हाँसैगा
अर फेर तो रात नै म्हारा बीरेन्द्र भी ना खाँसैगा
अर फेर तो रात नै म्हारा बीरेन्द्र भी ना खाँसैगा |
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