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कवितायें

 
 

देस जांदा परदेस जाईये

ज़मींदारां के बालक

पौ की एक जिड़ाई रात

कोर्ट में कुत्ता

रामलील्ला

पुलिसिया रोहतास

बीरेन्द्र अर बीड़

सींग अर पूंझड़

बिदाई का गीत

माटी का चूल्हा

तांगे ऑला बूढ़

रंग-बिरंगी होली आई

चुपचाप चिड़ी का बाप

कढ़ लिया, तू पढ़ लिय

बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैग

जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

सुणिये मेरी माँ

न्यारे-न्यारे स्वाद जगत मैं

बाज़ार मैं घर खटाया ना करत

बख़त तैं आइये

सिर मैं धूम्मां-सा रहै सै

म्हारे हरियाणा की सै बात निरॉली

वीर हरियाणे के

तीजाँ का त्यौहार आय

चन्नी चॉला खोटा होग्य

राबड़ी भी न्यूँ बोल

सवारी-ए-सवारी

तू आदमी बणता-बणता रहग्या

गेहूँ की बॉल

सॉच का बीज़ बोऊँगा

असली हीरो

आपणी बहाण प्यारी सै

बड़ रै बड़, तेरी पाणी मैं जड़

जीणा ? किते किसा, किते किसा

रावण  | दूस्सर

 
         
 

:: तू आदमी बणता-बणता रहग्या ::


मन्नै डांगराँ के हस्पताल मैं क्यूं ले ग्या

वो बीमार मेरे गैल इस बात पै फैह ग्या

 

भाई रै, शान्ति कर तू बीमार सै

किसे-किसे रोगां का तू शिकार सै

 

मैं तन्नै आड़ै एकदम बिल्कुल ठीक ल्याया

आड़े आके राज़ी होगी तेरी या बीमार काया

 

भूलग्या तू उस दिन एक बात पै अड़या था रै

मेरे गेल्यां छोटी-सी बात पै, कुत्ते की ढाल लड़या था रै

 

उस दिन बेरा पाट्यी थी, मन्नै तेरी औकात

जिस दिन एक गरीब कै तनै, गधे की ज्यूँ मारी थी लात

 

हर दम तू ठगी चोरी की, कैसी हामी भरे जा सै

कितै फंसज्या हराम का तनै, बकरी की ढाल चरे जा सै

 

उल्लू की ढाल्यां जाग कै, तू मिसकोट करै सै रातां नैं

फणियल तै घणा जहर दिख रया, मन्नै तेरी बातां मैं

 

कितै कोय भले का काम हो, तू घोड़े-सी मारै पछाड़

दूसरों का हक खावै सै तू, खागड़ की ढाल तोड़ कै बाड़ ==>

 

==>  पाणी के मैं प्यासी भरमती मछली की ढाल लोचता तू

भाईचारे की सड़ती लाश नै करगस की ढाल नोचता तू

 

क्यूँ भेड्डा बण कै किसे भोली भेड़ नै, चपर-चपर खाया करै

गादड़ बण क्यू झूठे गीत किसे के, लपर-लपर गाया करै

 

फेर बता मेरे गेल क्यूँ फहवै सै

आपणे-आप नै आदमी कहवै सै

 

सूं बुलदां की, मैं तन्नै आड़ै ना ल्याता

खामखा मैं तेरे गेल्या रोला ना जगाता

 

जै काली चिड़िया बणकै तू सुबह-सवेरे गाता तो

और नहीं तो मुर्गा बण कै लोगाँ नै जगाता तो

बणकै बुलद जमींदारा का खेतां मैं कमाता तो

और नहीं तो हाथी बण कै सर्कस का खेल दिखाता तो

 

फेर तो चाहे तू डांगर भी होता, तो भी ना घबराता मैं

तेरा इलाज़ करावण ख़ातर, माणसां के हस्पताल जाता हैं

तू तो आदमी बणता-बणता रहग्या

 तू तो मेरे गेल खाम-खा-ए फैह ग्या

 
         
       
 
         

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