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धूम्मां बण कै दम घोटे ना बण कै हवा निकल जा

या तो ढाल ले मनै अपणे मैं या मेरे की ढाल ढल जा

परबत के दो शिखर मिल नहीं सकते मिलन का के जतन हो

ले आज बहुंगा मैं बण झरणा सा तु भी बर्फ बण कै पिघल जा


 

 

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